Sunday, April 11, 2010

pyar ki kashis

की कोई दीवाना कहता है,2
कोई पागल समझता है ,
मगर धरती की बेचैनी को बस बदल समझता है,
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ तू मुझसे दूर कैसी हैं,2
ये मेरा dil समझता है या तेरा दिल समझता है,
मोहब्बत एक अह्शाशों की पवन सी कहानी है,
की कभी कबीरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है,
यहाँ सबलोग कहते है मेरी आँखों में आंसू हैं ,
jo तू समझे तो आंसू हैं ,जो न समझे तो पानी हैं,
समुन्दर पीर का अन्दर हैं लेकिन रो नहीं sakta,
ये आंसू प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता.२
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुनले,
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता,

1 comment:

  1. are waaah, Subhaan Allaah..tum shayari bhi karte ho, kabhi bataya nahi

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